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VASTU By Institute of Vedic Astrology Jan 21 2020

हमारे घर में जिस प्रकार हर एक कमरे का अपना महत्व है उसी प्रकार से पूजा घर / मंदिर भी हमारे घर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय पद्धति के अनुसार भी मंदिर घर में एक महत्वपूण स्थान रखता है, जहाँ विभिन्न देव व देवियों को स्थान दिया जाता है और उन्हें हर रोज़ पूजा जाता है, जिससे घर में शान्ति, समृद्धि और धन का आगमन होता है। 

घर में मंदिर एक पवित्र स्थान है जहाँ हम भगवान की पूजा करते हैं। इसलिए, स्वाभाविक रूप से, यह एक सकारात्मक और शांतिपूर्ण स्थान होना चाहिए। मंदिर क्षेत्र जब वास्तु शास्त्र के अनुसार रखा जाता है तो घर और वहां रहने वालों के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशी ला सकता है। हालांकि एक अलग पूजा कक्ष आदर्श होगा, यह हमेशा महानगरीय शहरों में संभव नहीं है, जहां जगह की कमी सामान्य रूप से पायी जाती है। 

आईए जानते हैं मंदिर और घर में मंदिर के स्थान से जुड़ी कई मुख्य बातें जैसे किस स्थान पर हो मंदिर की स्थापना, किस दिशा में मंदिर बनाना है उचित? पौराणिक और शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भगवान की पूजा और मंदिर का स्थान घर के एकांत स्थान में उत्तर - पूर्व के कोने में ही हो, जिसे ईशान कोण कहते है, किन्तु अज्ञानतावश कई लोग अपने शयन कक्ष में ही भगवान का स्थान स्थापित कर देते है जो कि सर्वथा अनुचित है। 

शंका व समाधान- 

किसी के घर में यदि परिस्थितिवश मास्टर बेडरूम के अलावा कोई स्थान नही है, तो वह व्यक्ति या तो रसोई के उत्तर पूर्व के कोने में मंदिर स्थापित करें किन्तु भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भी ऐसी परिस्थिति परिवारों में देखी गयी है, जहाँ केवल एक ही कक्ष में भोजन शयन और बैठक बनायीं जाती है। शौचालय या तो कॉमन होता है या जंगल का प्रयोग करते है।

जिन व्यक्तियों के पास एक कक्ष के अलावा दूसरा कक्ष नहीं है उन व्यक्तियों की परिस्थितियों के अनुसार मंदिर अथवा पूजा स्थान के बारे में गहन अनुसन्धान से यह स्पष्ट हुआ की वह मनुष्य या परिवार अपने उसी कक्ष के इशान कोण में किसी भी विधि द्वारा अपने इष्ट देव का चित्र स्थापित कर सकते है।

प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति, धातु, पत्थर, लकड़ी एवं रत्न आदि की मूर्ति उस स्थान पर न रखे, यदि गलती से रखें हो तो उन्हें मंदिर या किसी धर्माचार्य को सौप देनी चाहिए, जिससे उसकी विधिवत पूजा की जा सके। 

मंदिर से सम्बन्धित कुछ विशेष बातें- 

- प्रत्येक व्यक्ति को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की वह अपने आवासीय परिसर के अन्दर कभी गलती से भी सार्वजनिक मंदिर, शिवालय स्थापित न करे।  
- जिन घरों में स्थायी शिवालय देवालय या मंदिर होते है और नियमित पूजा-अर्चना नहीं होती वह परिवार निश्चित तौर पर घोर कष्टों को पातें है।
 
- जिन व्यक्तियों के घर मंदिर के आसपास हो या वह में मंदिर रहते हों, वो लोग भी बड़े धर्म संकट का शिकार बनते हैं, क्यूंकी ग्रहस्ति में सभी कुछ होता है, अतः वे लोग जहाँ तक संभव हो सके दूर जाने का प्रयास करें।
 
- जिन देवताओं के हाथ में दो से ज्यादा अस्त्र हों, ऐसी तस्वीरें और मूर्तियां भी मंदिर में न रखें। वास्तु के अनुसार इसे भी अशुभ माना जाता है।

वास्तु सम्बंधित आगे जानकारी लेने हेतु हमारे ब्लॉग पढ़ते रहे साथ ही हमारी संस्थान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी के साथ सीखें वैदिक वास्तु पत्राचार शिक्षा विडिओ कोर्स के माध्यम से घर बैठे कभी भी कहीं भी। आज ही सीखें वास्तु और बने वास्तु विशेषज्ञ।

 

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NUMEROLOGY By Institute of Vedic Astrology Jan 17 2020

अंक विज्ञान क्या है -सभ्यता का पहला मापदंड अंक है, क्योंकि जीवन में जो कुछ भी घटित हुआ है, हो रहा है या होगा। उसे व्यक्त करने के लिए भाषा के बाद हमें अंको का ही सहारा लेना पड़ेगा। किसी भी परिणाम का प्रारंभ और अंत अंक ही है। यद्धपि यह निश्चित है, कि अंक विज्ञान विश्व का सर्वाधिक प्राचीन व उन्नत विज्ञान है, पर आज के युग में जिस गति से मानव के निकट आया है। उसे ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है, कि अंक ही आज के मानव का सर्वाधिक विश्वस्त मित्र है। उसका सहचर है, सुख-दुख का संभागीय सहायक है, पथ प्रदर्शक है और पूर्णता सक्षम है। आप भले ही इसे छोड़ दें पर यह आपके निकट है। आपके जीवन का प्रत्येक क्षेत्र अंक शास्त्र से बंधा है। इसके द्वारा आप यह जान सकते हैं, कि आज का दिन आपके लिए कैसा है या अगला सप्ताह क्या होने वाला है और आपको क्या करना चाहिए। हमारा पूरा जीवन ही अंको का जीवन है, उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति की जो जन्म तारीख होती है। वह जन्म तारीख उसे बहुत प्रिय होती है। वह उसके जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बन जाती है, साथ ही उसके परिवार वालों के लिए भी वह बड़ी महत्वपूर्ण हो जाती है और वह तारीख व्यक्ति के जीवन में उत्साह का अनुभव देती है। इसलिए हम यह सब याद रखते हैं, कि हमारी शादी कब हुई, हमारी नौकरी कब लगी, हमारी पढ़ाई कब पूरी हुई या हमारे घर में कौन सा शुभ कार्य किस तारीख को हुआ था।

अंक विज्ञान में अंकों के प्रकार - अंक विज्ञान में अंक कई तरह के होते हैं, जैसे मूलांक, भाग्यांक, नामाक्षर, व्यक्तिगत अंक आदि इन सभी के द्वारा आप अंक ज्योतिष में अलग-अलग तरह की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और सभी अंक आपको भविष्य की ओर इंगित करते हैं और नई योजनाएं बनाने में सहायक होते हैं। व्यक्तिगत अंक द्वारा आप अपने मित्र और अपने शत्रु को बड़ी आसानी से पहचान सकते हैं। तो हम देखते हैं, कि व्यक्तिगत अंक क्या होते हैं।

व्यक्तिगत अंक - व्यक्तिगत अंक व्यक्ति के अपने अंक होते हैं, जिन्हें उन्हें अपने नामाक्षर के अंकों को जोड़कर स्पष्ट कर लेना चाहिए। अंग्रेजी के प्रत्येक अक्षर के लिए व्यक्तिगत अंक होते हैं। यह क्रम से 1 से 9 तक होते हैं फिर अगले अंक के लिए फिर एक अंक आ जाता है। उदाहरण के लिए A अंक 1 होगा, B का अंक 2 होगा, इस तरह क्रम से चलने पर J का अंक फिर 1 आ जाएगा, क्योंकि यह क्रम में दसवां अल्फाबेट है। इस प्रकार हर अक्षर के लिए हर अंक तय है।

अपने नाम के साथ प्रयोग करें - अल्फाबेट्स के साथ जो अंक तय होते हैं। उन अंकों के आधार पर आप अपने नाम में आने वाले अल्फाबेट्स के अनुसार सभी अंक लिख ले, इसका अर्थ यह हुआ कि आप अपने या किसी भी व्यक्ति के व्यक्तिगत अंक ज्ञात करने के लिए व्यक्ति के नाम के सभी अक्षरों को अंको में बदले और फिर उन्हें जोड़ ले। उदाहरण के लिए यदि आपका नाम अनिल है, तो आप के अक्षरों के हिसाब से अंक होंगे का , N का 5, I का 9  और L का 3 जोड़ने पर कुल 17 हुआ और उसका भी अंक 8 बनेगा इस तरह अनिल का व्यक्तिगत अंक 8 हुआ।

अपने मित्र या शत्रु को पहचाने - जिसके भी बारे में आपको पता करना है कि वह मित्र है या आप का शत्रु है या वह न तो मित्र है ना तो शत्रु है, तो उसके भी नाम के आप अक्षरों के अनुसार अंक बना ले। उन अंकों को जोड़कर उसका भी व्यक्तिगत अंक आपके पास आ जाएगा। आपका भी व्यक्तिगत अंक आपके पास है और सामने वाले व्यक्ति का भी व्यक्तिगत अंक आपके पास है। अब यह देख लीजिए कि क्या वे दोनों अंक एक है या अलग हैं। यदि वे अंक एक ही आते हैं तब तो वह व्यक्ति आपका मित्र होगा, हितेषी होगा परंतु यदि वह अंक अलग आता है, तो फिर यह देखना पड़ेगा कि क्या वह अंक आपके अंक से मित्रता रखता है या शत्रुता रखता है। इस तरह अंको की मित्रता और शत्रुता के अनुसार यह पता चल जाएगा कि सामने वाला व्यक्ति आपसे अच्छा भाव रखेगा या शत्रुता का भाव रखेगा। उसी के अनुसार आप उससे अपना व्यवहार तय कर सकते हैं और भविष्य की योजना बना सकते हैं।

आप यदि इन संख्यो के बारे में विस्तार से जानना चाहते है या अंक शास्त्र में ज्ञान आर्जित करना चाहते है, तो आप नुमेरोलोजी में हमारे सर्वश्रेठ संसथान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी से पत्राचार द्वारा कोर्स कर सकते है।

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Astrology By Institute of Vedic Astrology Jan 14 2020

Kites and happy faces are the symbols of Makar Sankranti. If you are an Indian you have surely flown a kite in the sky but the main difference here is that people celebrate this activity in the face of Makar Sankranti in many regions of India, according to their customs and traditions. 
The method and custom of celebrating Makar Sankranti are different in every culture and region of India. Makar Sankranti is celebrated mostly in the regions of Gujarat, Western Madhya Pradesh, Rajasthan, Haryana, Delhi, Karnataka, Tamil Nadu, and more states.  

Why it is called Makar Sankranti?
Makar is the zodiac sign Capricorn in Hindi. At this time the sun transits to the new zodiac that is Capricorn (Makar) sign that is why it is named Makar Sankranti. Makar Sankranti is the harvest festival. 

Makar Sankranti Festival-
Makar Sankranti is one of the most opportune days of the Hindu community and it is distinguished in almost all parts of India in countless cultural forms with immense fervor, joviality, and spirituality. This is the beginning of the month of Magh. 
Makar Sankranti is the date from when the Northward moment of the Sun begins. 
Before Makar Sankranti, the sun is in the Southern Hemisphere. Because of this reason in India, in winters the days are smaller and the nights are longer  
As per the mythological concept, it is said that Goddess Durga killed Devil Kinkarasur and won a battel from him and saved many people, that is why on that day Sankranti is celebrated. 
In many sections of the India Makar Sankranti is celebrated by making teel (sesame) 
Makar Sankranti is also known as the festival of bath and charity, in this time period people take baths in sacred rivers like Ganga and donates food, clothes and many things to poor people. People mostly donate sesame, jaggery, khichdi, fruits, etc to needy people through they can get benefits in their life if they have any fault (Dosh) in their zodiac. The Sun God is pleased with the donations made on this day. Especially eating khichdi with jaggery and ghee is important. On this day, waking and bathing of sesame is done early in the morning.

People who have zodiac Capricorn (Makar) should donate things and should do a holy bath in the sacred river of Ganga to have auspicious effects in their life. 


Commonly on this day, married women gift things to other married women near them. People use to eat things made from sesame and jaggery and children use to fly kites with their friends and family. 

For more information and updates on such topics do keep reading our blogs on the Institute of Vedic Astrology and Astralvarsity. Join our Distance Learning courses and Video Courses on Astrology and allied subjects and become an expert in the field with our premium course material.

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Fengshui By Institute of Vedic Astrology Jan 10 2020

                      There are probably few people who face financial crises, loss in business, instability in business or work after working hard or after investing a high amount of money they do not get the expected results or did not get the expected outcome.
There are various reasons behind not getting the expected and proper business or work outcome. But there might be a reason that the place is not as auspicious as your work or you might use some wrong steps or activities in your office like in regular sitting, location or any other work-related things. For getting a proper solution for this you can apply Feng Shui principles or tricks in your workplace or office to get the best results in your work.

What is Feng Shui and how does it work?
Feng Shui is a Chinese system of designing buildings, homes, offices, and space arrangement according to special rules about the flow of energy, which aimed to achieve harmony with the surroundings, because according to Chinese Mythology a system of spiritual energies, both good and evil are present in our environment.
It was majorly used in the China country but later with modernization, it got trendy in neighboring countries like India, Nepal, Bhutan, South Korea, etc. Now it is highly used and believed in India as well.
Applying Feng Shui not only harmonizes your house, office or living but also purifies the environment.


Some Feng Shui Tips to follow to get benefits-

  1. You should try to make the entrance of your office in the direction of the West or North. If you have a door in the East or South direction then you face damages in business. 
  2. The owner of the business should always sit in the direction of West or South and he should not sit facing the back towards any gate or window. 
  3. If you don’t feel like sitting or working so long in your business work you can place a crystal on your table for that. 
  4. You should put feng shui coins tied with the sacred red thread of Feng Shui in your locker where you generally save money. 
  5. You should always place a mirror above the main entrance gate if the entrance gate is facing any tree, temple, electricity pole, sewage or any other thing which holds the flow of positive energy. 
  6. You can also place Gems tree in the North direction of the office this will bring profit in business. 
  7. A laughing buddha should be placed in front of the entrance of the main door so that it can attract every person entering the office as well as it will increase the profit of the business. 
  8. You should face electric connections and extensions in the direction of the West or South it will give auspicious results and will protect every person from the accidents. 
  9. In feng shui, the right location of walls can promote a good flow of energy and enhance the positive feelings in a home or an office.
  10. If you are working in the work of a creative field try to give the desks in the proper directions to your employees. 

There are many other aspects when it comes to Feng Shui if you are passionate about your business and work then you can also learn Feng Shui as a course in some institutes like the Institute of Vedic Astrology and become an expert of your business with their online distance learning course

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Astrology By Institute of Vedic Astrology Jan 07 2020

पूजा का अर्थ

जब हमें किसी मनुष्य से बातचीत करनी होती है, तो हम भाषा का प्रयोग करते हैं और उससे सीधे सीधे बातचीत करके अपनी बात उसे समझा लेते हैं। जब हम किसी कंप्यूटर जैसीकिसीमशीनकोकमांडदेतेहै,तब हम उसके कीबोर्ड द्वारा या उसके स्विच या बटनो द्वारा उसे अपनी बात समझा लेते हैं, कि हम उससे क्या चाहते हैं। परंतु जब हमें परमात्मा से बात करनी होती है, तब हमारे पास भाषा का साधन सीधा-सीधा नहीं होता, क्योंकि परमात्मा हमें दिखाई नहीं देता। तब उस अदृश्य शक्ति तक अपनी बात पहुंचाने के लिए जो सशक्त माध्यम होता है, वह होती है पूजा। जो कार्य एक मशीन द्वारा नहीं हो सकता। वह कार्य पूजा के द्वारा हो जाता।

पूजा के विभिन्न चरण

एक सफल पूजा के लिए विभिन्न चरण होते हैं, जो कि इस प्रकार हैं।

पवित्रीकरण

पूजा विधान का कार्य पवित्रीकरण की क्रिया से प्रारंभ करते हैं। यह एक भावनात्मक क्रिया है, सर्वप्रथम पूजन के द्वारा परमात्मा का एवं प्रकृति का ध्यान करने से पहले अपने आप को मन आत्मा एवं शरीर से पवित्र करना, मनवाणी एवं शरीर द्वारा अपने को शुद्ध करना, अर्थात भावना करना, कि अब मैं अत्यंत सात्विक कर्म करने को तैयार होता हूं। एवं एकाग्र भाव उत्पन्न करता हूं, इस भावना से शरीर एवं आत्मा का पवित्रीकरण करने की विधि की जाती है।

शिखा बंधन

शिखा रखना भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। शिखा स्थान बुद्धि का वह केंद्र स्थान है, जहां से बुद्धि में सभी प्रकार के विचार उत्पन्न होते हैं। उन्हें स्पाइनल कॉर्ड के द्वारा समस्त शरीर के अंगों तक पहुंचाने का कार्य इसी स्थान से प्रारंभ किया जाता है। स्पाइनल कॉर्ड मस्तिष्क से जुड़कर मस्तिष्क के समस्त विचारों का संप्रेषण करती है। इसीलिए इस स्थान पर शिखा रखी जाती है, जो स्पाइनल कॉर्ड का बाह्य स्वरूप है और गणपति का स्वरूप है, अर्थात पूजा विधि प्रारंभ करने से पूर्व परमात्मा से प्रार्थना करते हैं।कि बुद्धि उत्तम विचारों का संप्रेषण करें पूजा का प्रत्येक सद्भाव बुद्धि द्वारा शरीर को पूर्ण रूप से प्राप्त हो।

तिलक धारण करना

पूजन करने के पूर्व तिलक की स्थापना माथे पर की जाती है। कुमकुम रोली के द्वारा अथवा चंदन के द्वारा माथे पर तिलक धारण किया जाता है। अधिकतर मंगल कार्यों में कुमकुम का ही प्रयोग होता है। कुमकुम इसलिए माथे के अग्रभाग पर लगाते हैं, क्योंकि यह हमारी बुद्धि का अग्रभाग है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में फ्रॉम कॉल लॉग कहते हैं। योग की भाषा में इस स्थान को आज्ञा चक्र कहते हैं। इस आज्ञा चक्र को शांति प्रदान करने के लिए कुमकुम लगाया जाता है। मन में प्रश्न यह उठ सकता है, कि कुमकुम ही क्यों लगाया जाता है। वह इस कारण की कुमकुम का निर्माण हल्दी एवं चूने को मिलाकर किया जाता है। हम सभी जानते हैं, कि हल्दी औषधि के समान गुण रखती है। हल्दी को घाव पर लगा दो तो ठंडक पड़ जाती है। जले हुए पर लगा दो तो ठंडक पड़ जाती है। उस औषधि गुण आयुक्त हल्दी एवं चूने के रासायनिक मिश्रण से कुमकुम का निर्माण होता है, जो आज्ञा चक्र पर लगाने से आज्ञा चक्र को शांति एवं एकाग्रता मिलती है। इसी प्रकार चंदन भी आज्ञा चक्र को ठंडक प्रदान करता है, इस भावना से बुद्धि को शांति प्रदान करने के लिए कुमकुम एवं चंदन का लेप आज्ञा चक्र पर किया जाता है।

रक्षा सूत्र

रक्षा सूत्र शब्द से ही समझ में आता है, कि पूजा करने वाले यजमान के उस हाथ में जिसके द्वारा वह पूरी पूजन क्रिया को क्रियान्वित करेगा रक्षण एवं पवित्रता के लिए रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा बनी हुई है।

संकल्प

जिस भी विशेष पूजा का प्रकरण होता है, उसके अनुकूल परमात्मा के सामने संकल्प लेते हुए उस पूजन को करने का एवं उससे अच्छे फल की कामना करने हेतु इस संकल्प का विधान पूजा पद्धति में किया जाता है। इसमें पूजन की तारीख दिन समय संवत एवं चंद्र एवं समस्त ग्रहों की नक्षत्र एवं राशि गत स्थिति इत्यादि का विवरण देते हुए, उस व्यक्ति से संकल्प लिया जाता है। जिसके द्वारा वह पूजा करने वाला व्यक्ति परमात्मा से प्रार्थना करता है, कि उसकी पूजा का श्रेष्ठ फल उसे एवं उसके परिवार को प्राप्त हो।

* स्वाति वचन*

अर्थात शांति पाठ वह भी एक बहुत ही सुंदर प्रथा हमारी पूजा में होती है, जो पूजा प्रारंभ करने से पहले हम शांति पाठ करते हैं। इसका तात्पर्य है, कि पूजा के पूर्व पृथ्वी पर उपस्थित सभी जड़ एवं चेतन तत्वों को शांति मिले उनका हम पर आशीर्वाद रहे और प्रकृति के तत्वों से मानवजाति प्रसन्न रहो ऐसा भाव रखकर वैदिक मंत्रों का पाठ किया जाता है। उन सभी मंत्रों का यही तात्पर्य होता है, कि सब जगह सुख शांति हो पृथ्वी पर, अंतरिक्ष में, जल में, वनस्पति में, औषधि में सभी कुछ जो ईश्वर ने ब्रह्मांड में बनाया सभी को शांति प्राप्त हो इस प्रकार और भी अनेक मंत्र होते हैं, जो प्राकृतिक तत्वों से हमें सुख प्रदान करने की भावना से लिखे गए।

गणपति स्थापना पूजन का प्रारंभ गणपति की स्थापना से ही होता है। कोई भी विशेष कार्य हो विवाह, भूमि पूजन, ग्रह प्रवेश, व्यापार प्रारंभ, लक्ष्मी पूजन अथवा ग्रहों की शांति के पूजन या और भी किसी प्रकार की पूजा हो सर्वप्रथम गणपति स्थापना की जाती है।सभी शुभ कार्यों को करने से पहले गणपति की स्थापना की जाती है, क्योंकि सभी कार्य स्वस्थ बुद्धि के द्वारा ही संभव होते हैं। अतः सर्वप्रथम गणपति जी की स्थापना कर उपासना कर परमात्मा से प्रार्थना की जाती है, कि वह हमारी बुद्धि को स्थिर करें ताकि यह शुभ कार्य संपन्न हो सके।

पंचतत्व पूजन

यह पूजन गणपति स्थापना के पहले किया जाता है, जिसमें दीप प्रज्वलन कर पूजा का प्रारंभ किया जाता है। जो कि अग्नि की पूजा करने के लिए किया जाता है। दीप प्रज्वलन का कर पूजा का प्रारंभ इसलिए किया जाता है, क्योंकि सर्वप्रथम पूजन प्रारंभ करने से पहले परमपिता परमात्मा को जो दिव्य ज्योति के स्वरूप में है या अग्नि पुंज के स्वरूप में हैं, तो उनके उसी स्वरूप को सार्थक रूप में पूजने के लिए अग्नि जलाई जाती है। दूसरा कारण यह है, कि पंचतत्व जिनसे यह मानव शरीर बनता है, उसका पहला तत्व अग्नि है, अग्नि के द्वारा ही हमारा शरीर जीवित और स्वस्थ है जठराग्नि हमारे खाए भोजन को पचाने का कार्य करती है। भोजन का पचना और शरीर का जीवित रहना इस अग्नि के बिना संभव नहीं, इसी तरह हमारे शरीर का तापमान अभी अग्नि के द्वारा ही स्थिर रहता है। अतः अग्नि हमें हमेशा स्वस्थ और जीवित रखती है, इसलिए इस अग्नि का सर्वप्रथम सम्मान किया जाता है।

कलश स्थापना

प्रत्येक पूजन विधि में कलश स्थापना अवश्य की जाती है। कलश स्थापना कर ब्रह्मांड को नारियल का स्वरूप देकर उस पर समस्त देवताओं का आव्हान किया जाता है। पांच पान के पत्ते रखे जाते हैं या आम के पत्ते रखे जाते हैं, जिसका संकेत होता है कि हमें अपनी प्रकृति को बचाना है और कलश में जल भरकर यह संकेत होता है, कि जल हमारे जीवन के लिए कितना जरूरी है।

इसी तरह के अन्य विषयों में जानने के लिए आप वैदिक ज्योतिष शास्त्र विषय में अध्यन कर सकते है। इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी जो एक सर्वश्रेष्ठ संस्थान है, जो आपको इस तरह के विषय में आपको तीन प्रकार से कोर्स उपलब्ध करता है। जैसे वैदिक एस्ट्रोलॉजी, विडियो वैदिक एस्ट्रोलॉजी तथा कॉम्बो कोर्स और वो भी दूरस्थ पाठ्यक्रम द्वारा आपके घर बैठे आपकी इच्छा अनुसार।‍

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Gems&Crystalstherapy By Institute of Vedic Astrology Jan 03 2020

 Wear Gems cautiously before wearing as per Astrology- 

Almost every individual scholar, material science related scientist and astrologer has unanimously accepted this very fact that gems radiate a special type of light. These specific lights irrespective of their nonvisibility does affect human life in one or another form. This effect is very much similar to that effect which comes into the earth from the planets. Astrological experts and other experts related to this subject matter have given a principle according to which every planet has a resembling stone on the earth. This stone is considered a Gem and there are several types of Gem unlike various kinds of planets on our solar system. Sun has a similar effect producing stone which is known as a Manik, Moon has its resembling stone with the name of Moti, Mangal has Munga, Budha has Panna, Guru has Pukhraj, Sukra has Diamond, Shani has Neelam, Rahu has Gomeda and Ketu has Lahsunia. These stones have very similar effects on what their associated planets are having on our well beings.

Select the metal of Gems with utmost care:

If you wear any Gem without knowing its perfect suitable ally metal then, it will do more harm than any good effect for its wearer. After many years’ research and intense observation subject experts came to this conclusion that one should wear any precious Gem with its properly suitable combination making metal like Gold, Silver, Copper, Germanium etc.etc. One can wear these Gems after putting them into the ring or locket.

The alliance of various Gems with different-different metal is as follows:

A-   Manik with the Gold

B-   Moti with the Silver

C-   Munga with the Gold 

D-   Panna with the Gold 

E-   Pukhraj with the Silver 

F-  Diamond with tri-metal (Tridhaatu)

G-  Neelam either with tri-metal or with the Silver 

H -Gomed with the Panchadhatu 

I - Lahsunia with the Panchadhatu 

Although, in this classification, there is a difference of opinion too. Many rich and wealthy people use to wear any such Gem with Gold or any other precious metal which is actually recommended only with the Silver. This is not at all recommended from the point of view of astrology and it may give adverse effects instead of giving some benefit to that person who is wearing it. It is a proven fact that Diamond and Moti are not beneficial when they are used with the Gold. Before wearing any Gem and selecting its ally metal one should take proper advice of any knowledgeable astrologer.

Select Gem’s wearing order with utmost care:

Many people wear NavRatna rings in their fingers or chain in their neck just for the sake of fashion. On the other hand, many people wear them for getting instant benefits. This is a very tricky situation and one should always wear such kind of Navratna ornament with its appropriate order according to the science of astrology. This order must be in such a way that the first row must have Panna and Diamond in the second row there must be Pukhraj with Manik and Munga, in the third row there must be Lahsunia, Neelam and Gomed.  This order very clearly indicates that in the first row there are Buddha, Sukra and Moon. In the second row, there are Guru Surya and mangal, in the third row, there are Ketu, Shani and Rahu planets. One should wear any Gem after keeping this very fact and this precisely defined order only   

Wear Gem with its proper weight:

Any that ornament, including the ring which consists of Navratna, is beneficial only when it is worn inappropriate weight according to the astrological calculation. Many such precious ornaments are useless or without any good results producing the effect which is not made of right pr proper weight. Only wearing precious gem is not that important but it is important to \wear them with proper weight and proper combination.

Before wearing any Gem know its friendliness and enmity :

It is a very natural and common fact that like-minded people like one another’s company but in contrast those who are lacking like-mindedness and if they happen to meet with one another will not like one another’s the company and they will enjoy unpleasant company.

If the characteristic of any gem is not matched with another, it will give ill effects and create a very unpleasant situation in day to days life. Before wearing any Gem one must check very carefully, whether it is friendly or not for him or her. Many Gems if not worn according to its friendly nature may cause harmful effects, therefore it is very important to wear them wisely and according to the principles of astrology.

Follow our latest and upcoming blogs to get more information about different Gems and Stones from our institute, the Institute of Vedic Astrology. And you can also learn more things about Gems in the IVA from an online distance learning course

 

 

 

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Astrology By Institute of Vedic Astrology Dec 31 2019

Every person is different from each other and hold some unique qualities and skills within them. Astrology shows their different personalities through their zodiac signs. Each zodiac sign is different from each other and shows the different qualities and faculties of a person.
Each different sign holds different qualities and specialties in it. Those people who have creativity inside them, are seems to be more attractive by nature and preferences.
Then, there are some signs that are very creative and innovative by their nature. These particular signs are special and different from other zodiac signs. According to astrology, creativity in every individual is dependent upon the planets which are present in their horoscope, and we can assume their nature and attitude according to their zodiac sign.
If any person is aware about his or her inner quality, then they are able to choose the right career track in their life, and it also helps them in other ways also.

Signs which are creative by their nature-

  • Virgo (Kanya)
  • Leo (Singh)
  • Taurus (vrishabh)
  • Capricorn (makar)
  • Pisces (Meen)

These are the most creative zodiac signs (Rashis) in astrology. Now we will get to know about the faculties present in these signs.

  1. Virgo (Kanya)-
    People with Virgo sign always tries to perform something different than others. They always try to learn new and different things. They usually don’t waste their time on unnecessary things and use to mind their own business.
  2. Leo (Singh)-
    They are the people who are very creative and innovative by their nature. They always try to give their life, be it personal or professional. They always work to give their best in their life and don’t leave any room for error in their work.
  3. Taurus (vrisabh)-
    The people lying in this sign are much imaginative and creative by their nature. They can do their best in creative sections related to money or property. Taurus people are good painters as well, and no one can beat them in it.
  4. Pisces (Meen)-
    These people are much thoughtful and imaginative. They are always stuck in their own thoughts and imagination and then work according to it.
  5. Capricorn (makar)-
    People with Capricorn sign are much practical than other signs. They always use to learn new things and then work according to it or apply those tips in their present work. They bring out something new after learning, that’s why they seem to be more creative among all.

The above signs were the most creative signs in astrology. If you want to know more about zodiac signs and its effects on human nature, you can also learn Vedic astrology from the Institute of Vedic Astrology, which will give you better knowledge about astrology from their online training distance learning course, with their online video course.


 

 

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ASTROLOGY By Institute of Vedic Astrology Dec 28 2019

People are much excited about their future predictions. What they are going to have in the future, where they will going to have success, they will get money or not, how will be their health, etc. Every person wants to know the answers to these questions.

It is very important to get your future predictions so that you will be able to control the unfavorable situations and can enjoy favorable situations well. If you will get an option to change your future or destiny then you can absolutely able to change that with the help of Astrology. In this modern generation where people are dependent on their karma (deeds) on the other side, Astrology is also dependent on your karma. If you will get to know the future prediction as per your Astrological sign you can control and manage the future situations.

Every day is a new day and every year is a new life. To live your new year full of positivity and changes you should have a look at your zodiac predictions as well, it will help you to know about future holds for you in the new year.

Institute of Vedic Astrology has got the right predictions for your zodiac sign with which you can make your new year prosperous and favorable for you.

You can also learn Astrology to get your future predictions.

While discussing the astrological signs and predictions you should also know about its various aspects like it differ person to person according to their zodiac sign. Each sign has its own pros and cons and it works according to the positions of planets especially Moon, Saturn, Jupiter, and Sun. The placement of those planets in a particular house defines the person’s zodiac situation.

The upcoming year 2020 is full of opportunities and chances for all 12 zodiac signs. The 2020 Astrology forecasts that the year will be refreshing and full of new challenges for some particular zodiac signs. Let’s have look at some of the zodiac signs and their future predictions.

Aries-

  The year 2020 has something big and interesting for you, as it is coming with new challenges and opportunities for you in the upcoming year. In the horoscope of Aries people, Jupiter along with Saturn and Mercury are going to position in the 10th house, which is the indication that you will be going to achieve something big in the future. But don’t forget to put your hard work in your job or career to make your life easy going. The money will be stable and you should not use your cunning and strategies to gain money in an unethical way.

Taurus-

Including the planet Jupiter and Saturn the Mercury is seen to be weaker in the 9th position of the house. Don’t be tensed about it because it will not go to harm you. All you need here is to work with full of your heart and mind. There are chances of having a religious trip in 2020, if you are interested in spirituality then it will surely lead you to a religious journey. The trip is going to help you to get new ideas and to gain the capacity to fight with battels and stress in your life.

Gemini-

  The planet Saturn will be going to positioned at the 9th house in your horoscope. This year going to be positive for you as you will face peace of mind and satisfaction within yourself. It might be possible that you can have some health-related issues this year. You can start exercises and Yoga to make yourself fit and to avoid unusual illnesses and diseases.

Cancer-

All the major astrological planets are going to positioned in the 7th house, Jupiter is seen to be weak here, as you may face new challenges and difficulty in this upcoming year. Here you need to start working on your self-esteem to be motivated and empowered towards your goals.

Leo-

In 2020 the Sun is going to rule your sign and all the major planets are going to be positioned at 6th house. Here you can expect some major changes in your life. You should also stop thinking about unnecessary things. In the mid-2020 you can expect some good luck for you, as destiny is going to have something big for you.

 

To know more about 2020 Astrology predictions, follow our website blogs or you can also learn Astrology from the Institute of Vedic Astrology with their online distance learning course.

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GEMS_HEALING_&_CRYSTAL_THERAPY By Institute of Vedic Astrology Dec 26 2019

मोती एक नाम अनेक

हिंदी में जिसे मोती कहते हैं, संस्कृत में उसे मुक्ता कहते हैं या मुक्ता फल कहते हैं, अरबी और फारसी में गौहर मौरवादीद और अंग्रेजी में पर्ल कहते हैं।

प्राप्ति स्थान

मूंगे की तरह मोती भी पत्थर ना होकर जीवो विशेष के पेट से उत्पन्न होने वाला एकशैलखंड है। मोती की उत्पत्ति के विषय में अनेक मत प्रचलित हैं, सबका सार यह है कि समुद्री सीप की एक जाति विशेष के पेट से मोती निकलता है। यह सीप शिकारियों के द्वारा पकड़ा जाता है और फिर उसे मारकर पेट चीरकर मोती निकाला जाता है। अब तो वैज्ञानिकों ने कृत्रिम मोती बनाना प्रारंभ कर दिए हैं। समुद्री सीपी पाल कर उन्हें कुछ ऐसे विशिष्ट पदार्थ खिलाए जाते हैं जो सीपी के पेट में स्थित होकर विभिन्न तत्वों से अवतरित होकर मोती के रूप में बाजार में आते हैं, किंतु सर्वश्रेष्ठ मोती वही होता है, जो प्राकृतिक रूप में सीपी के पेट से निर्मित हुआ हो और चमक बनावट की दृष्टि से निर्दोष हो।

मोती के गुण

.मोती एकऐसारत्न है, जो कई सदियों से मनुष्य को लुभाता चला आ रहा है।मोती को रोजमर्रा की जरूरतों के हिसाब से पहना जा सकता है। साथ ही मोती एक ऐसा रत्न है, जिसे पूरे समय धारण किया जा सकता है। मोती की बनावट के अनुसार मोती के उपयोग भी होते हैं। मोती चंद्रमा ग्रह का रत्न है और चंद्रमा ग्रह निश्चित रूप से मन का कारक होता है। इसलिए सीधी सी बात है, कि मोती रत्न मन पर बहुत प्रभाव डालता है। एक अच्छा मोती मन को नियंत्रित कर पूरे जीवन को व्यवस्थित कर सकता है। ऐसे लोग जिनका मन बहुत चंचल होता है और उस चंचलता के कारण यदि वे जीवन में असफल होते हैं, तब मोती सबसे बढ़िया साधन होता है। उस मन को स्थिर करने का परंतु उसके लिए चपटा मोती धारण किया जाता है। एक स्वच्छ और चपटा मोती मन को व्यवस्थित कर एकाग्र करता है।इसके लिए बसरा का चपटा मोती श्रेष्ठ होता है।

ज्योतिष के आइने में मोती

कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा होता है और चंद्रमा का रत्न मोती होता है। इस आधार पर चंद्र रत्न मोती कर्क लग्न वालों के लिए निर्विवाद रूप से अनुकूल सिद्ध होता है। मोती धारण करके कर्क लग्न वाले व्यक्ति बहुत कुछ लाभ की अनुभूति करते हैं। सद्विचार, दीर्घायु, बौद्धिक, संपन्नता, स्वास्थ्य, लाभ, सौंदर्य, सद्भावना और प्रणयक्षेत्र में मोती उन्हें निश्चित रूप से लाभकारी होता है। ऐसे जातक यदि आजीवन मोती पहनने रहे, तो सहसा उन्हें किसी अभाव विरोध और विसंगतियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

मोती एक औषधि के रूप में

सौंदर्य के अनुसार तो मोती रत्न और लाभकारी होता ही है। परंतु औषधि के रूप में भी मोती बहुत लाभकारी होता है। यदि मोती नारंगी रंग का है, तो वह रक्तविकार, रक्तस्त्राव, नेत्र विका,र तिमिर रोग, वक्ष पीड़ा, शारीरिक दुर्बलता, शक्ति हास, दृष्टि दोष, वीर्य दोष और कांति हास आदि रोगों में बहुत लाभकारी औषधि के रूप में सिद्ध होता है और इस बात की पुष्टि ज्योतिष शास्त्र के साथ-साथ भौतिक शास्त्र यानी कि पदार्थ विज्ञान शास्त्र भी कर चुका है।

विशेष रोग मिर्गी में मोती

भारतीय विद्वानों ने रत्नों के विभिन्न उपयोगों का अनुसंधान किया है। उनका निष्कर्ष है, कि जिस प्रकार आयुर्वेद में रत्नों की भस्म और पीष्ठी का प्रभाव रोग निवारक होता है। उसी प्रकार रत्न को उसके मूल रूप में धारण करने से भी रोग विकार शांत होते हैं। मिर्गी के रोग में मोती रत्न चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। भ्रम, उन्मत्ता,मौन, प्रलाप और चेतना दौरा मिर्गी जैसे उपद्रव में और उनके शमन में मोती बहुत चमत्कार करता है। मानसिक और मस्तिष्क संबंधी विकारों में मोती धारण करके रोगी जन पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं।

मोती विभिन्न आयाम

अंक शास्त्र के अनुसार मूल अंक दो होने पर उसके स्वामी ग्रह चंद्रमा के अनुकूल रत्न मोती पहनने पर लाभ प्राप्त होता है। साथ ही जब वर्णों के अनुसार रत्नों का विभाजन किया जाता है, तो वैश्य वर्ण के लिए मोती रत्न उपयोगी होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि व्यापारी वर्ग यदि मोती धारण करता है और विशेषकर सबसे छोटी उंगली में यदि मोती पहनते हैं, तो व्यापारी वर्ग के लिए यह बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। वैवाहिक अवसर पर वधु को मोती का उपहार दिया जाना कल्याणकारी होता है। वैसे भी मोती शांति दायक है, इसे धारण करने से व्यक्ति की मानसिक.अस्थिरता, उलझन, उत्तेजना, शुष्कता दूर हो जाती है यह रत्न ज्वर और मस्तिष्क की।उष्णता को शांत करके तन मन को निरोग व शीतल बनाता है।

सभी लग्न और मोती

मेष लग्न वाले जातकों का चंद्रमा कुंडली के चतुर्थ भाव में विराजमान होता है, यह एक शुभ स्थिति है। उधर मेष लग्न का स्वामी मंगल है, जो चंद्रमा का मित्र है। इस प्रकार मेष लग्न से चंद्रमा को सहयोग मिलता है। ऐसे लोग मोती धारण करके चंद्रमा और मंगल दोनों की कृपा प्राप्त करते हैं। वृषभ लग्न वालों को मोती नहीं पहनना चाहिए। मिथुन लग्न वाले जातक के लिए मोती का प्रभाव आने का होता है, उसे यह रत्न धारण नहीं करना चाहिए। कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा है, इस आधार पर चंद्र रत्न मोती कर्क लग्न वालों के लिए निर्विवाद रूप से अनुकूल सिद्ध होता है। मोती धारण करके कर्क लग्न वाले व्यक्ति बहुत कुछ लाभ की अनुभूति करते हैं। सिंह लग्न वाले जातकों के लिए मोती हानि-कार होता है। अतः उन्हें नहीं पहनना चाहिए। कन्या लग्न वाला व्यक्ति को मोती रत्न विविध प्रकार के भौतिक सुख उपलब्ध कराता है। ऐसे व्यक्ति यश, कीर्ति, मान-सम्मान, संतान-सुख और अर्थ लाभ अवश्य प्राप्त करते हैं। तुला लग्न वालों को मोती धारण करना वर्जित है। चंद्रमा की स्थिति वृश्चिक लग्न वालों के लिए अनुकूल रहती है, अतः चंद्र रत्न मोती उन्हें शुभ फल देता है। ऐसे ऐसे लोग जो वृश्चिक लग्न में जन्मे हो, मोती धारण करके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में व्यवसाय, धन, उपार्जन, यात्रा, आध्यात्मिक क्षेत्र में लाभ उठाते हैं। धनु लग्न वालों को मोती नहीं पहनना चाहिए। मकर लग्न वालों को भी मोती नहीं पहनना चाहिए। कुंभ लग्न वालों को भी मोती विशेष फलदाई नहीं होता है, परंतु मीन लग्न वालों को मोती पहनने से लाभ मिलता है।

इसी तरह के अन्य रत्नो के बारे में जानने के लिए आप हमारे संसथान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी से जेम्स एंड क्रिस्टलथेरेपी में पत्राचार द्वारा अध्यन कर सकते है।

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NUMEROLOGY By Institute of Vedic Astrology Dec 24 2019

  Following the path suggested by any number can be a myth but it’s true that every number holds your destiny according to your date of birth. Everything related to your numerology is dependent on your date of birth. 
            There are many types of numbers which vary person to person according to his date of birth and sometimes the time of birth. 
                In numerology, there are some numbers which are termed as lucky numbers, unlucky numbers, life path numbers or auspicious/inauspicious numbers. Then there come the master numbers, they can be just as much of a curse as they can be a blessing also.
Every number in numerology is significant, yet there are special numbers which can be observed by the numerologists as master numbers. Those master numbers of numerology are 11, 22, and 33. 
           Number 11, 22 and 33 are called as master numbers in numerology which can be proved as strongest numbers for the person who have these numbers in his or her birth chart. 
       These numbers have profoundly powerful meanings in it and they can appear in your chart, they can advise you in difficult situations of your life. 

With the help of numerology and the master numbers, you can uncover your specific yet hidden and unique talents so that you can increase the chances for success in all fields of your life. 
 
Number 11-
     This number represents instinct and it is the most intuitive of all the numbers. It will give you the feeling of knowledge and is also termed as a ‘number of faith’.  The negative aspect related to this number is anxiety, shyness, and stress in humans. 
If you have this number in your numerology chart, you can use this number to create personal power and spiritual development. 

Number 22-
A person with this number holds great confidence and leadership qualities. It is the practical number, as it can be beneficial for the people who are attached with business-related activities. People with this number are capable of changing their lush dreams into solid reality. 

Number 33-
The person having 33 in his or her numerology chart has the ability to throw them into a project that goes far beyond the practicality and makes it come true. 
Number 33 is rare and it is only significant if it is one of your core numbers like life path number, personality number, heart desire number, etc. 
These people are highly knowledgeable and always recheck the facts before executing any new project or idea. 

Learn Numerology to understand more about numbers and its meaning in your life. 

Institute of Vedic Astrology is offering you online training in a distance learning course of numerology, under supervision of experts in numerology. Come join the course to become a numerology expert. 

   Following the path suggested by any number can be a myth but it’s true that every number holds your destiny according to you date of birth. Everything related to your numerology is dependent on your date of birth.
There are many types of numbers which vary person to person according to his date of birth and sometimes time of birth.
In numerology there are some numbers which are termed as lucky numbers, unlucky numbers, life path numbers or auspicious/inauspicious numbers. Then there comes the master numbers, they can be just as much of a curse as they can be a blessing also.
Every number in numerology is significant, yet there are special numbers which can be observed by the numerologists as master numbers. Those master numbers of numerology are 11, 22, and 33.
Number 11, 22 and 33 are called as master numbers in numerology which can be proved as strongest numbers for the person who have these numbers in his or her birth chart.
These numbers have profoundly powerful meanings in it and they can appear in your chart, they can advice you in difficult situations of your life.

With the help of numerology and the master numbers, you can uncover your specific yet hidden and unique talents, so that you can increase the chances for success in all fields of your life.
 

Number 11-
This number represents instinct and it is the most intuitive of all the numbers. It will give you the feeling of knowledge and is also termed as a ‘number of faith’.  The negative aspect related to this number is anxiety, shyness, and stress in humans.
If you have this number in your numerology chart, you can use this number to create personal power and spiritual development.

Number 22-
A person with this number holds great confidence and leadership qualities. It is the practical number, as it can be beneficial for the people who are attached with business-related activities. People with this number are capable of changing their lush dreams into solid reality.

Number 33-
The person having 33 in his or her numerology chart has the ability to throw them into a project that goes far beyond the practicality and makes it come true.
Number 33 is rare and it is only significant if it is one of your core numbers like life path number, personality number, heart desire number, etc.
These people are highly knowledgeable and always recheck the facts before executing any new project or idea.

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KPAsrology By Institute of Vedic Astrology Dec 21 2019

Every person wants to know the answer to their different life-related questions like which things are going to happen and when? When they will get married or when they will get the right job? Here the term known as KP Astrology will surely work for them to predict their upcoming life or future events in a much predictional manner.

Astrology is the science related to the planets and KP Astrology is the extension of Astrology. The KP Astrology is basically known as Krishnamurthy Paddhatti Astrology which was developed by the late prof. Krishnamurthy. The KP Astrology is developed with the help of Vedic Astrology which is Indian Astrology and Western Astrology which is generally used in Western countries. So, we can say that this is developed with a mixture of both Vedic and Western Astrology.

The KP Astrology system of Astrology is commonly used to predict future events with higher accuracy. In Vedic Astrology, things can be predicted easily like what things will going to happen in the future but KP Astrology shows that when things are going to happen.

What is Krishnamurthy Paddhatti Astrology?

In the KP Astrology, the birth chart is made by classifying the 12 houses of the birth chart. This system of Astrology suggests besides looking for the planet movement and positions on the particular sign, you can look for the planet according to the placement in the particular constellation (Nakshaktras). Also, it is important to look for the lord of the particular constellation. So, hereafter seeing the positions and movements according to the constellations the final predictions are done. Through this system and process, the new technique of astrological prediction has been developed. This is the easiest method of getting the right future predictions.
In this system, no planet is auspicious or inauspicious. This system suggests that those planets who are giving its positive impacts are the auspicious planet and the one who is not are inauspicious planet.

Principles to predict any event as per KP Astrology-
The one and most important principle to predict the future according to the KP Astrology are that one should look after the main house in the birth chart and its upper constellation (Nakshaktras) lord. And if the lord is in the higher house in the birth chart then it will give better results in the event prediction. To get the right time prediction in this system the astrologer looks after the ‘Vimshottari Mahadasha’ according to the KP Astrology.

Prashna Kundali (Question chart)  the new trend-
According to our Hindu Astrology system if any person has got his or her birth chart or not he will always have many questions that are not possible to be answered only with the help of the birth chart that questioned are answered with the help of Prashna Kundali (Question chart). General questions like, when a person will get married, when the child is going to take birth or when one will get a house or flat etc, this type of questions are generally answered with the help of birth chart only, but to get to know about, at which floor one will get the flat can be answered with the help of question chart. When will someone gets the job can be answered by the birth chart but in which area, field or post one will get the job this can be answered by the Question Chart easily.
In this process, the question chart is been prepared to give the answers to the questioner. The answers are given according to the planetary positions and effects at that particular time, this is how the KP Astrology system works.

Where to learn about KP Astrology?

Anything can be learned easily through various methods and techniques. KP Astrology can also be learned easily through various options available in front of you. The best option to learn about KP Astrology is from the Institute of Vedic Astrology. The institute is known for its quality education in online distance learning courses with the guidance of expert faculties and study material. Join the institute and learn the art of predicting future events.


 

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Astrology By Institute of Vedic Astrology Dec 19 2019

कन्या राशि वालों का पंचमी शनि

गोचर क्या है।

हम सभी जानते हैं, कि पृथ्वी के साथ-साथ सभी ग्रह सूर्य का चक्कर लगाते हैं। यही गोचर कहलाता है। चंद्रमा सबसे तीव्र गति से परिक्रमा करता है और शनि सबसे धीमी गति से परिक्रमा करता है। इसी गति को समझने के लिए मनुष्य ने जन्म कुंडली का निर्माण किया और उसमें 12 खाने बनाए। इन 12 खानों को भाव कहते हैं और एक राशि में किसी ग्रह के रहने का समय और फिर अगली राशि में जाने को उसका गोचर कहते हैं। चंद्रमा सबसे एक राशि से दूसरी राशि 2.15 दिन में पहुंच जाता है। जबकि शनि ग्रह को एक राशि से दूसरी राशि तक जाने में ढाई वर्ष लगते हैं।

शनि ग्रह

ऐसे तो शनि ग्रह बड़ा लाभदायक रहता है, परंतु वह बहुत धीमा चलने वाला होता है और धीमी गति से परंतु स्थाई लाभ देता है। जब शनि ग्रह नाराज हो जाता है या फिर कष्ट देता है तो वह अत्याधिक कष्ट देता है। जनसाधारण में शनि की साढ़ेसाती बहुत प्रचलित है, क्योंकि साढ़ेसाती में पूरे साढे सात वर्ष कष्ट के ही बीते हैं, परंतु शनि की एक स्थिति ऐसी भी होती है। जो भी जो साढ़ेसाती के बराबर ही कष्ट देती है और वह स्थिति होती है चंद्र लग्न से पंचम स्थान का शनि इसे कहते हैं पंचमी शनि और कर्नाटक में एक कहावत है कि पंचमी शनि फूटे मटके में खाना खिलाता है।

पंचमी शनि कैसे कष्ट देता है

कर्नाटक प्रदेश में साढ़ेसाती से अधिक दर पंचम शनि का मानते हैं। शनि जब पंचम भाव में हो, तो उसकी दृष्टि धन दौलत के दोनों भागों अर्थात द्वितीय तथा एकादश पर पड़ती है। साथ ही व्यापार के स्थान सप्तम भाव पर भी इस कारण उनका यह डर भी निर्मल नहीं। जब मनुष्य के धन भाव और लाभ भाव पर संकट आता है, तो निश्चित रूप से उसे बहुत कष्ट प्राप्त होता है। साथ ही पंचम स्थान में स्थित शनि की दृष्टि सातवें भाव पर पड़ती है। जो कि व्यापार का भाव है और दांपत्य जीवन का भाव है। व्यापार पर संकट आना मनुष्य पर के जीवन पर संकट आने जैसा होता है। साथ ही दांपत्य जीवन में मतभेद होना और भी कष्टकारी बात होती है।

पंचमी शनि कौन-कौन से कष्ट देता है।

24 जनवरी 2020 को शनि मकर राशि में प्रवेश करेगा और कन्या राशि वालों के लिए यह शनि पंचमी शनि रहेगा। तो अगले ढाई वर्षों तक कन्या राशि वालों को कुछ परेशानियां हो सकती है, परंतु यदि अभी से उपाय किए जाएं। तो शनि कष्ट नहीं देगा, अन्यथा शनि धन की हानि करता है साथ ही आय को कम करता है। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद देता है। समाधान इस संकट से बचने के लिए बहुत सारे उपाय और समाधान हमारे पास हैं, परंतु उनको समझने के पहले हम शनि ग्रह के स्वभाव को समझते हैं। शनि ग्रह ऐसा ग्रह होता है, जो पहले व्यसनों के लिए उकसाता है, परंतु बाद में वही दंड भी देता है। तो हम इस सब से बचने के लिए यह उपाय करें, कि इस छोटी ढहिया के दौरान व्यसनों का त्याग कर दें। साथ ही यदि कहीं बाहर जाना पड़े, तो अपने साथ घर से भोजन लेकर चले, साथ ही पानी भी लेकर चले। जहां तक संभव हो इसके साथ ही यदि किसी रिश्तेदार के घर भोजन करना पड़े। तो किसी ना किसी रूप में उस भोजन की कीमत अदा कर दे। इस अवधि में ना तो किसी से लोहा दान में लें और ना ही किसी को लोहा दान करें और ना ही लोहा खरीदें। जहां तक संभव हो अपाहिजओं को कंबल का दान करें और यदि वह विधवा हो और साथ ही अपाहिज भी हो तो अति उत्तम।

प्रभावशाली उपाय

शनि की इस छोटी ढैया के दौरान दान करने वाली जो वस्तुएं होती है। वह काला उड़द, तेल, नीलम, काला तिल, कुलथी, भैंस, लोहा बर्तन के रूप में, दक्षणा, काला कपड़ा आदि पदार्थों का दान, शनि ग्रह की प्रसन्नता के लिए करना चाहिए। साथ ही शनि की स्तुति का मंत्र

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम ।
छाया मार्तंड संभुतम तम नमामि शनिश्चरा।।

इस मंत्र की स्तुति करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। साथ ही मंत्र के जप करने से जो कि दो प्रकार के मंत्र हैं पहला है।

“ओम शं शनिश्चराय नमः” और दूसरा “ओम प्राम प्रीम प्रौम स शनिश्चराय नमः” साथ ही विशेष रूप से शिवपूजन, हनुमंत पूजन और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

इसी तरह के कई विषयो के बारे अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप हमारे सर्वश्रेठ संसथान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी से ज्योतिष शास्त्र में दूरस्थ पाठ्यक्रम द्वारा अध्ययन कर सकते है। जो आपको इसे अध्ययन करने के तीन प्रकार के कोर्स उपलब्ध करता है, जैसे वैदिक ज्योतिष शास्त्र, वीडियो द्वारा वैदिक ज्योतिष शास्त्र और कॉम्बो कोर्स

 

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FENGSHUI By Institute of Vedic Astrology Dec 17 2019

We all know that our planet and our life work with the help of natural elements. There are various kinds of natural elements that are present on our earth but there are five main elements without which we cannot imagine our life. But have you ever wondered that not only our life but our whole personality is also connected and based on these natural elements. These natural elements are Fire, Water, Earth, Metal, and Wood. It will be interesting to know that our nature and our body are also dependent on these particular elements.
Here we will be explaining to you, how these elements are connected with our life and personality. 

As it is cleared that, what are the main five natural elements which are connected to our life and personality. Feng Shui suggests that each of the five elements is connected to our daily life which cannot be replaced. In the day to day life of the people, these elements play a pivotal role. For cooking food, we use fire elements. The water element is used for our survival on this planet as no living entity can survive without water, humans, animals, plants, everything needs water. Through the help of Earth or land, one gets the place to build their house, grow trees, crops, food, etc. The metal element is used to make jewelry, interior decoration, construction, making accessories, etc. And the last element which is wood is used to make necessary items in the house like furniture and other wooden material. All these five elements have many applications in human life.

All these elements are also used in Astrology for predicting the future of the person and the Chinese traditional medicines connect these five elements with the body organs. These elements are not used in Feng Shui but they are pervasive in nature which is used in every aspect of life.
In Feng Shui, it is used to maintain the flow of energy in and outside of the house. The main function of Feng Shui is to maintain a balance between the positive and negative energy which later harmonizes the environment of the house. But Feng Shui has also connected these elements with human’s life and personality. It also suggests which element should be placed at which direction in the house, so that people living in the house can enjoy the positivity of the house to the fullest.

Let’s get to know about each element and how it is connected with our personality and you can also check which natural element you are! 

 

  1. Fire Element-
    The main source of the fire element is the sun. Our planet and the whole creation absorb solar radiation from the heat produced by the sun. Most of the fire element is the energy-giving element. In Feng Shui, the fire element is connected with the fame and the outer personality of the human being. These people are aggressive in nature but have an impressive personality that can easily attract others towards them. 
  2. Earth Element-
    The earth element is represented by the soil, rock, and ashes. On this earth some portion is covered with soil, some with stones and some with vegetation and greenery. These kinds of people are generous in nature, they are ready to help others at any time and also they are social and cheerful as they have their roots connected with the earth. 
  3. Water Element-
    Water is the most important part of life not only for humans but for every living entity in this world. People who are connected with this element are soft-hearted and peaceful from their nature. Water element has the flow so the people connected with this element love to be in flow in their life. These people are also emotional as well as creative and sensitive. 
  4. Metal Element-
    Metal is the natural phenomena that are found under the earth’s crust. Metals are hard and stuff by their nature, so as the people. Those people who are tough, honest and straightforward are connected with the metal element. These people have strong will power to do everything in their life. They also take responsibility effectively. 
  5. Wood Element-

In the five elements wood shows the plants and green vegetation. With the help of the earth and water element, the wood gets developed in the form of a tree or plant. Its energy rises towards the sky and shows growth. It is also related to the new beginnings of the cycle. People who are deep thinkers and fast thinkers are connected with this element. These people have the quality to cheer and enlighten the people. As well as they create a different kind of environment around them.


There is more and deeper information about every element in Feng Shui for that you can learn Feng Shui from the Institute of Vedic Astrology. This is the best destination where you can learn the subject with the help of online distance learning courses. Join the IVA and know yourself better and also create a change in your house’s environment. 

 

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Gems_and_Crystal_therapy By Institute of Vedic Astrology Dec 14 2019

 There are many crystals and gems on this planet but some are rare and some are commonly found. One of the most precious stones on this planet is Pearl. The pearl is considered as the queen of gems, which has huge benefits in it. There are many other stones but some stones have different healing power as well as Astrological benefits in it. 

Where the Pearl is found?
Just like the Coral (Munga) stone, the pearl is found in the deep oceans. ‘A pearl is a hard, glistening object produced within the soft tissues of living shelled mollusk.’  Later mollusk is collected by the shell collectors and after killing the living shell they collect the pearls which are inside it. 
Normally people assume that the real pearl only looks round and white but it has more colors. The pearl is available in black, grey, pink, white, purple, blue, green, yellow and brown color. Nowadays scientists usually try to develop a masterpiece of the pearl by using different techniques, but we can assume the real one which is developed naturally without any scientific method of producing. 

The qualities of the Pearl-
The pearl is the kind of gemstone that is simply loved by many people in this world and used by millions regularly. Some people use this stone on a daily basis and some people use this occasionally. The pearl is normally used according to the texture and structure it has got. 
According to the astrological aspect, the pearl is related to the planet moon. So it is said that the planet moon controls the mind and thoughts of the person, so the pearl also controls the thoughts and the mind of the people. It is said that a good pearl can control your mind and can make your life more organized and manageable.  
The person who is weak from their inner thoughts and mind can use the pearl to make themselves bold and strong. In this situation, one can wear a flat pearl to take more advantages and benefits from it. 

Pearl and the Astrology-
There are many astrological benefits of gem pearl. If we look forward to the qualities of the pearl, it is the gemstone of planet moon. The Cancer zodiac ascendant’s lord is the moon, so the people who have cancer zodiac can wear pearl and it will surely give them the great benefits in their life. The people who have their zodiac cancer should wear the pearl gemstone for their whole life as it will give them great benefits like good health, prosperity, positive thoughts, beauty, and goodwill. Most importantly if is worn for a lifetime then it will always keep the negative thoughts and problems away from the native. 

Pearl as a Medicine-
The pearl has hundreds of benefits in it. It can be used for many purposes but did you know it also has the medical property. The pearl not only enhances the beauty of the person wearing it but has huge medical benefits as well. If the color of the pearl appears light orange in color then it will be used to cure many health issues like blood disorders, eyesight faults, eye disorder, physical weakness, thoracic disorders, and many more health issues. 
This is also proven by material science that using that particular type of pearl can improve many health disorders. 


Various Dimensions of Pearl-
As we have said before that the pearls have hundreds of benefits in it. So it is used in many other fields also. If you believe in Numerology science then the people who have their radix 2 (Mulank) then can wear pearl, as radix 2’s lord is the moon and we know pearl is the gemstone of the moon. 
If we just separate the uses of pearls according to the caste and community than the people of Vaishya community (one of the Hindu caste) can wear pearl as this will be beneficial or them as mostly Vaishya people are business person, so if they wear pearl then it will surely give them the great benefits in their business and personal life. 
If it is gifted to the bride in her marriage then it will give her a prosperous life ahead.  
If it is worn by the people who have regular stress and anxiety in their life, then it will give them mental peace and calmness. 

How to know to learn about Pearls?
There are many sources and options through which one can learn about the pearl and various other gemstones. One of the best ways to learn about gemstones is from the Institute of Vedic Astrology, India. The institute is known for its online distance learning courses in various subjects like Gems and Crystal Therapy, Astrology, Feng Shui, etc. Learn Gems and Crystal therapy and become a master of gemstones. 

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VASTU By Institute of Vedic Astrology Dec 12 2019

हमारे जीवन में पौधों की भूमिका

सबसे पहले यह पृथ्वी आग का गोला थी फिर यह ठंडी हुई और इतनी ठंडी हुई कि फिर इस पर सबसे पहले वनस्पति उगना प्रारंभ हुई और उसके बाद जीव जंतु आए और अंत में मनुष्य शायद इसीलिए मनुष्य को आज भी मैं वनस्पतियों और प्रकृति से बहुत प्रेम है क्योंकि वह उन्हीं का एक हिस्सा है वनस्पति में भी कुछ पौधे जंगली होते हैं परंतु कुछ पौधे लाभकारी होते हैं वह आपके मन को भी खुशी देते हैं और आपके शरीर को स्वास्थ्य देते हैं साथी आपके घर का वातावरण उर्जा माई बना देते हैं

पौधे कुछ कहते हैं

जब हम घर बनाते हैं तब हमें यह नहीं पता चलता कि हमें कौन से पौधे लगाने हैं तो हमें जो पौधे मिल जाते हैं हम उन पौधों को ही लगा लेते हैं परंतु सभी पौधे शुभ नहीं होते हैं कुछ पौधे जैसे नागफनी या कैक्टस बहुत कांटेदार पौधे हमारे घर के लिए भी शुभ नहीं होते हैं और हमारे मन की स्थिति के लिए भी शुभ नहीं होते हैं इसके स्थान पर फूलदार रसिया खुशबू वाले वृक्ष हमारे मन को भी सुकून पहुंचाते हैं और हमारे घर के वातावरण में एक नई ऊर्जा लाते हैं तू हम समझते हैं कि कौन से पौधे लगाना चाहिए और कौन से पौधे नहीं लगाना चाहिए

चमत्कारी पौधे

कुछ पौधे घर की सकारात्मक ऊर्जा के लिए चमत्कारी सिद्ध होते हैं परंतु उन्हें किस दिशा में लगाना यदि इस बात का भी ध्यान रख लिया जाए तो और अधिक शुभ होता है घर की उत्तर दिशा में पौधों का रोपण करना शुभ होता है परंतु तुलसी को घर की सीमा में कहीं भी लगाना शुभ होता है पूर्णांक अशोक मोलश्री शमी तिलक चंपा अनार पीपली डाक अर्जुन गंभीर सुपारी कटहल केतकी मालती कमल चमेली मल्लिका नारियल केला एवं पाटन वृक्षों से सुशोभित घर लक्ष्मी का विस्तार करता है

अशोक वृक्ष

अपनी सगन सुखदाई नहीं छाया के द्वारा इस वक्त ने जिस प्रकार मां सीता के दुख को कम किया था ठीक उसी प्रकार इस वृक्ष के कई ऐसे औषधीय उपयोग हैं जो कि स्त्रियों में होने वाली व्याधियों को काफी हद तक करने में सक्षम है अशोक की छाल में टैनिन तथा कटे चिन्ह नामक रसायन पर्याप्त मात्रा में होते हैं जो कि औषधीय महत्व के हैं अशोक से निर्मित अशोकारिष्ट नामक औषधि बहुत गुणकारी है अशोक के बीजों को दो माशा चूर्ण को जल के साथ नित्य कुछ दिनों तक लेने से अश्वरी रोग चला जाता है अशोक के वृक्ष के नीचे स्नान करने वाले व्यक्ति की ग्रह जनित बाधाएं दूर होती हैं मंदबुद्धि स्मृति लोक के शिकार एवं ऐसे जातक जिनकी पत्रिका में बुध ग्रह नीच का हो उनके लिए अशोक वृक्ष के नीचे स्नान करना अत्यंत शुभ कार्य है

केला

केले का वृक्ष लगाना हर तरह से सुखदाई होता है जहां एक और केले के पत्ते पर भोजन किया जा सकता है थाली के रूप में वहीं पर दूसरी ओर पका हुआ केला शीतल वीर्य वर्धक शरीर के लिए पुष्टि दायक मांस को बढ़ाने वाला भूख प्यास को दूर करने वाला तथा नेत्र रोग और प्रमेह नाशक होता है पेट के कीड़े मारने तथा खून शुद्ध करने के लिए केले केले की जड़ के अर्क का सेवन लाभदायक है केले की अर्क को बनाने के लिए लगभग 1 किलो जल में 50 ग्राम केले की जड़ डालकर इतना गर्म करें कि जल की मात्रा आदि हो जाए इसके बाद इस मिश्रण को  96 यही छना हुआ जल केले का अर्थ है

पीपल

किसी भी घर में पश्चिम में पीपल वृक्ष का होना अत्यंत शुभ है ज्योतिष शास्त्र की मान्यता है कि शनि ग्रह से पीड़ित व्यक्ति को शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाने से पर्याप्त शांति प्राप्त होती है पीपल की परिक्रमा करने से देवता प्रसन्न होते हैं तथा ग्रहों का कुप्रभाव नहीं रहता है

अपने जीवन या संबंधित लोगों के इन तत्वों और पहलुओं के बारे में अधिक जानने के लिए आप IVA से वैदिक वास्तु के विषय में ऑनलाइन अधययन कर सकते हैं। आप भी एक कुशल ज्योतिष बन सकते है, अगर आप किसी प्रतिष्ठित संसथान से वैदिक ज्योतिष विषय में अध्यन करते है, तो जैसे  इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक एस्ट्रोलॉजी

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Gems&Crystal By Institute of Vedic Astrology Dec 10 2019

Being an Indian we are all aware of Indian customs and traditions. In India, everything is divided into the category according to its properties whether they are clothes, food, customs or language everything holds its importance in human life. 

In India gems also plays a very important role in the ancient time period. In ancient India, people who were kings and queens use to wear crowns and heavy jewelry made with precious gems and stones which gives them energy and mental stability to tackle the kingdom. Later in modern India people are using gems and stones as jewelry, to cure disease, for remedies and luck rising. We can say that one gem has thousands of properties.


In the family of gems and stones, one of the most precious gems is Rudraksha. The Rudraksha is connected with human beings scientifically as well as spiritually. It is scientifically proven that Rudraksha has remedial powers and positive energy, and spiritually it is associated with Lord Shiva.
The ancient Rudraksha beads are now getting popular because of their scientific and spiritual effects on the human body and mind. It is identified that it gives physical and mental power to the person using or wearing it.

What are the Rudraksha beads?

Rudraksha beads are the dried fruits of the Rudraksha tree whose scientific name is Eleo Carpus Granitrus. These are commonly found in India and Nepal mainly found in the Himalaya region. They are also found in Thailand and Indonesia. Now at this time, there are only a few trees of Rudraksha are left due to modernization, as these trees were used to make the railway sleepers that is why it is found limitedly in India and Nepal. 

 

Here we will tell you about the Rudraksha therapy which you can use to cure many serious diseases and problems.
In ancient times it was used to cure different diseases and modern science shows that the electromagnetic nature and vibrations of Rudraksha beads affect the neurophysiology of humans. 

 
There are many kinds of Rudraksha which are used purposely by humans to solve many problems in their life related to health, mind, career and wealth.
The main purpose of using Rudraksha by humans is their healing property. There are various kinds of Rudraksha like 1 Mukhi (faced), 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 11(faced) commonly known & some others too which are rare. 


These are used particularly for curing various problems related to health, mind, career, education, and business.


  • For getting relief in blood pressure you can wear Rudraksha and try to put it close to your heart as it will help to keep your BP stable and it does not let it go up or down. 
  • The most serious diseases which still do not have proper medication that is Cancer and Aids can be cured using Rudraksha. Externally wear it or you can also use it internally by drinking the milk boiled with Rudraksha beads and consuming water of Rudraksha dust. 
  • Hysteria, Coma, and female diseases related to their genital organs can be cured by wearing 6 faced Rudraksha of 3 beads. 
  • You can remove your sleeping disorders with the help of 8 faced Rudraksha. 
  • If someone has a problem related to the nervous system can wear 11 faced Rudraksha.   
  • If your children are having a problem of frequent fevers and easily get sick you can let them wear 3 faced Rudraksha.
  • If you are facing mental stress, tension or depression you can use 7 and 14 faced Rudraksha to overcome negative thoughts and unnecessary stress. 

There are many more types of rudraksha in this world. One of the best rudraksha is also the 8 faced rudraksha, which can be used in many ways for the betterment of life and health, to know more about other benefits of Rudraksha you can learn Rudraksha therapy from the Institute of Vedic Astrology. At IVA you will get the quality learning about various gems and stones under the proper guidance with online distance learning courses. Learn to use the various gems as a remedy with IVA, Indore.

 

 

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PALMISTRY By Institute of Vedic Astrology Dec 07 2019

Have you ever wondered that your hands are not just the hands but it is a deep source of information and secrets about you! Well, many of us haven’t thought about it before, that our hands are the sea of information. If you are aware of the art of Face Reading then you must know that Face Reading is the art of analyzing the features of the face just to get the deep knowledge and information about the person only with help of their facial parts.

In this art, you can get to know about yourself only by analyzing and reading your hands, which means your palm and the lines are just like the book of your secrets and talents.
This art of reading palm and palm lines is known as Palmistry.

Palmistry is the art of reading palm and palm lines through which we can get to know about the person in dept and we can also predict their future as well.

There are different mounts in everyone’s hands which simply show many aspects of the person and his personality. There many people who don’t have proper ideas about their personality but they can get to know about it through Palmistry.

What are the Mounts in Palm?
The mounts are kind of fleshy bumps on your palm which resides under your every single finger. This is termed as mount because it looks like a mountain on your palm. They play a very important role during the reading of the palm. These mounts are related to the planets which hold a different meaning in your hand and show your personality as well as the future.

There are a total of 7 mounts in someone’s hand-

  1. Mount of Jupiter- This situated at the base of your index finger.
  2. Mount of Saturn- This is situated at the base of your middle finger.
  3. Mount of Sun or Apollo- This mount is situated under your ring finger.
  4. Mount of Mercury- This situated at the base of your little finger.
  5. Mount of Moon- That is situated in the base of your palm under your little finger. 
  6. Mount of Venus- This mount is situated under the base of your thumb. 
  7. Mount of Mars- Mars mount is of two types-
    • Inner Mars 
    • Outer Mars 

The inner mount of Mars is situated between the mount of Jupiter and Venus, and the second outer mount is situated between the mount of Mercury and Moon. 

Let’s get the idea about every mount in detail to get the best information about ourselves.

1. Mount of Jupiter- The mount of Jupiter represents the authority and will power. The person has this mount properly developed then it shows that the person is ambitious, career-minded, responsible, honest and reliable in nature.
If it is flat then it means that the person is clumsy, dishonest and has no proper morals in his life.

2. Mount of Saturn- This mount is related to the perceptive and integrity of things. Properly developed mount represents the independent, sincere, intelligent and hardworking person. If the mount is less developed or fully flat it means that the person easily gets sad and depressed and feels lonely most the time.

3. Mount of Sun- The person having this mount in a developed manner has the qualities of getting clever at most of the situations, loves art and literature and able to accept the other’s opinion. 

If this mount is low in someone’s hand it means that the person is poor in aesthetics, has no fortune in making and does not love arts.

4. Mount of Mercury- This mount represents wisdom. As the person having fully developed mount of Mercury are good at their work, manages things properly, witty and has a high ability to think. If this mount is absent in someone’s hand it means that the person is not willing to work hard, he is negative and has no will to do anything.

5. Mount of Moon- This mount is connected with imagination and mystery. As the person who is having this mount developed are imaginative, creative thinkers and loves to be in freedom. If this mount is less or underdeveloped then it means the person has a lack of ideas and he is conservative about everything.  

6. Mount of Venus-
This mount represents love emotions and affection. The well-developed mount shows a sympathetic, gentle and attractive nature. They have good fortune in love. The one who doesn’t have this mount developed is having a lack of energy and is very cold-hearted and sometimes rude.

7 Mount of Mars-

i) Inner Mars- This mars is termed as the positive mars as the person having this mount nicely developed is courageous, healthy and full of adventures. And undeveloped mount people are timid and indecisive in nature.
ii) Outer Mars- This termed as negative mars. People who are having this mount fully developed are fearless, don’t’ take risks in money-making works. The one who has lesser developed outer mount is having a lack of endurance, they can keep calm as they don’t have patience and weaker in solving problems attentively.

Institute of Vedic Astrology, Indore which is the best institute in India and the USA provided Distance learning courses on Palmistry through which you can learn Palmistry easily and become a master in this skill. Join and know yourself better and help others with Palmistry.

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Astrology By Institute of Vedic Astrology Dec 05 2019

भूमिका

प्रकृति ने मनुष्य को छठी इंद्री के रूप में मन का उपहार दिया है। इस सौगात के बलबूते पर मनुष्य कई अनसुलझी पहेलियां भी सुलझा लेता है और कई रहस्यों से पर्दा भी उठा सकता है।  उनमें से एक गुण यह है कि वह शुभ या अशुभ को देखकर उनके मूलभूत कारणों का पता भी लगा सकता है| शायद यही वजह है, कि ज्योतिष शास्त्र के आधार पर जीवन में होने वाले कष्ट देखकर राहु के अशुभ होने की बात पता लगा सकते हैं|

स्थितियां कष्टों के अनुसार अशुभ राहु -

जीवन में जब कष्ट आते हैं, तो उनके कारण अशुभ ग्रह होते हैं। अलग-अलग ग्रहों के अशुभ होने पर अलग-अलग प्रकार के कष्ट मिलते हैं। हम राहु की विभिन्न अशुभ स्थिति को उनके परिणामों द्वारा समझते हैं।

  1. यदि जीवन में सुख की हानि है या अपमान मिल रहा हो या परिवार से समाज से अपमान मिल रहा हो तो समझना चाहिए कि राहु जन्म कुंडली में अशुभ होकर लग्न में बैठा है।
  2. यदि जातक को धन हानि हो रही हो, खास कर स्थाई या पैतृक संपत्ति की हानि से नुकसान हो या व्यापार में धन हानि हो या जातक की वाणी में क्षोभ हो या वाणी में कटुता कहीं गई हो या कुटुम से वियोग या विरोध हो तब उस स्थिति में राहु अशुभ होकर द्वितीय भाव अर्थात धन भाव में बैठा होता हैl
  3. यदि जातक के परिवार में कलह - क्लेश बढ़ गया हो या उसके मन में दुख निराशा हो या कृषि या संपदा की हानि हो रही हो, तो निश्चित रूप से अशुभ राहु चौथे भाव अर्थात माता के भाव में स्थित है।
  4. यदि जातक की बुद्धि भ्रमित होने के कारण हानि हो रही हो या उसे सबके प्रति कु विचार आते हो या वह कुसंगति में पड़ गया हो या उसे पुत्र या मित्रों से दुख व क्लेश मिल रहा हो या उसके हर कार्य में बाधा आती हो तो समझना चाहिए कि अशुभ राहु पंचम भाव में स्थित हैl
  5. यदि जातक के अपनी पत्नी से मतभेद हो या उसके दांपत्य जीवन में तनाव हो या उसके साथ अलगाव की स्थिति हो तो निश्चित रूप से अशुभ राहु सप्तम भाव अर्थात विवाह स्थान में स्थित है ।
  6. यदि जातक को हर क्षेत्र में अपमान मिल रहा हो या हर कार्य में असफलता वह अपयश मिल रहा हो या उसके पद से उसे कई बार अब अवनति मिलती हो या उसे महान शारीरिक कष्ट उठाने पड़ते हो तो ऐसे में जन्म कुंडली में अशुभ राहु अष्टम भाव अर्थात मृत्यु के स्थान में स्थित होता है l
  7. यदि जातक के अपने पिता से मतभेद या विरोध होते हो या गुरुजन से विरोध होते हो या उसके भाग्य में बाधा या हानि होती है, तो उस स्थिति में राहु अशुभ होकर नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान में स्थित है।
  8. यदि जातक के आपस में खर्चे बढ़ गए हो या उसे अनावश्यक जुर्माना भरना पड़ रहा हो या दंड का भागी बन रहा हो या उसे शारीरिक पीड़ा अधिक हो या उसकी बंधन की स्थितियां हो तो निश्चित रूप से अशुभ राहु द्वादश भाव अर्थात बारहवें स्थान में स्थित है।

निष्कर्ष- इस प्रकार जातक के जीवन में मिलने वाले परिणामों से राहु के अशुभ या शुभ होने के संकेत मिलते हैं।

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Astrology By Institute of Vedic Astrology Dec 03 2019

Every new day holds new opportunities and new beginnings. So just like the days, every new month is a new life. The new month brings new hopes, wishes, challenges, and desires. All you need is to identify the opportunities and make it more fruitful for you. 
The new month holds different things and different situations according to the person; this is because every person has different horoscope and different zodiac signs. The effects of the horoscope are different in each zodiac as per Astrology. To get to know about the various aspects of Astrology according to the months and its effects on the person’s life we must get a basic idea about Astrology and horoscope. 

What are Astrology and Horoscope?
Astrology is the study of celestial objects in the sky, where every each and every change in the position of the planet affects human lives. This is the science behind the planetary effects and changes in the sky. Its aim is to study the positions, motions, and properties of the different planets and how it affects the human’s life on the earth. 

Horoscope-
The horoscope word is developed with the Greek words ‘hora’ and ‘scopos’ which means time and observer. This simply observes the time and positions of the celestial objects that are planets. 
We consider a horoscope an astrological chart or a kind of diagram which represents the movements of the planets, Sun, Moon, Saturn, Mercury, Venus, etc at the time of the birth of the person. It also shows the astrological aspects and other sensitive angles at the time of an event or the birth of the person. 

Now according to Astrology, every person has a different horoscope and different zodiac. This is the main reason why the effects of the planets and their positions affect the person individually. 

The upcoming month is December 2019 which is bringing new beginnings and waxing cycle (a cycle between which moon occurs between the new moon and full moon) for the people which is great for jumping into action. This will gonna highly affect the particular signs and going to provide them more philosophical attitude in life. All the planets like Jupiter, Saturn, Mercury, and Venus are looking into proper harmony within each other.
As the year is going to end soon but the effects of planets and positions will last. 

This is the last month through which you can make your endings much better and remarkable with your work, passion, goals, and opportunities. As we have discussed before that every person has different effects in their horoscope according to their sign this month. 
Lets’ have a look at the changing positions of the different planets in some particular zodiac signs and some of its effects. 

-The sun will be going to remain in Sagittarius until the end of December as it will promote enthusiasm, desire to be joyful and happy and searching for new opportunities. 

- Mars and Mercury will be there for the whole month in Scorpio, this will going to bring courage, energy, and combative nature in the native. 

-The planet Venus is going to shift in Capricorn. This will be quite difficult for the people having this sign as they will go to have little arguments with their loved ones and troubles in their love life as one should keep calm and patience to handle the situation. 

- Jupiter will be going to enter in Capricorn as it will increase your endurance and self-respect. 

- Mercury is also going to transit in Sagittarius. The best suggestion for the Sagittarius people is to be optimistic as this the key to your success. 

- When Venus is going to shift to the other sign Saturn will be shifting to Capricorn after the Venus. As will going to give you the big changes in your life like an abundance of affluence, authority, increase in the administrative skill and high designation. 

The best way to predict your life and days is Astrology where you will be having every minute details about the positions and effects of the planets in your life. Else you can also learn Astrology to get accurate predictions by yourself. 
The best place for Astrology is the Institute of Vedic Astrology which is offering online distance learning courses , online video courses all over the world with the best quality study material and guidance with the option of online Combo courses. Come join the institute to become a part of Astrology.

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Vastu By Institute Of Vedic Astrology Nov 25 2019

Do you always look after the beauty of the plants wherever you go? Or you just love to maintain the bulk of plants into your house to make it more beautiful and close to nature? 

As we all know plants and trees are the source of our life as plants and trees provide us the oxygen to live and survive. But they are more to it as it also helps to bring prosperity in life. 

There are many people out there, who just love to plant trees and shrubs in their houses to make it look more beautiful and attractive. You will be surprised to know that plants and trees are also a part of Vastu!

What is Vastu?
Vastu is the ancient science of architecture which helps us to manage the energies and vibes in and around the house with the help of some principles and techniques.

The one who believes and follows Vastu in their house will surely like to get to know about particular plants and benefits from it. But for the ones who love to have plants in their house should also have a look at it. Here you will get interesting facts about plants as per Vastu which will not only make your house beautiful but through Vastu, it will also make your house more peaceful and healthy living. It will be interesting to know that plants and trees are used as cures and remedies in Vastu and it actually gives its effects positively.

Do you ever think that, in how many ways you can just use the particular plant or tree in your house to make it more peaceful and happy? Well, maybe no! According to Vastu indoor plants also holds great significance as well as health benefit and difference. In Vastu also it holds great significance and importance.  Not only Vastu but plants have huge significance in Chinese Feng Shui also. 

Let’s check out some interesting tips and information about plants and Vastu in your house.

Indoor plants have great benefits too. Basil, Money plant, Lily, Lotus, and Jasmine are some plants that can easily be planted indoor and which later provides great significance as it brings a positive flow of energy in the house.

  1. Basil Plant
  2. Money Plant
  3. Lotus
  4. Lily
  5. Jasmine

 

  1. Basil- Basil is the most auspicious and sacred plant in India. It is believed that it is most pious among all as it also contains its medical benefits to the user. If you want to place that according to the Vastu you can place the Basil plant in the north, northeast or east direction, but it shouldn’t be placed in the south direction.
  2. Money Plant- This plant has its own unique features in the house. This plant is planted inside and outside of the house for getting great benefits from it. As the name suggests this plant promotes money that is wealth. This is the plant that attracts money in the native's house when planted or placed as per Vastu. As it can increases the money-saving habit of the person and increases the flow of the money in the house. 
  3. Jasmine- Women use to wear Jasmine flowers in their hairs because it is said that it brings good luck and prosperity in the family. It is also used as the traditional medicine against skin disease, ulcers and other skin related problems.
  4. Lotus- Lotus is the most beautiful flower in the Indian culture and it is used in many ways as well. But according to Vastu you can place Lotus at the entrance of the house. You can also place it in the house as well. The Lotus is located with Goddess Laxmi as well.
  5. Lily- It can easily be planted inside and outside of the house. As it is the plant which can be placed in less sunlight and can be planted anywhere in the house. For the house which doesn’t have the proper windows or ventilation, it is the best plant to be grown inside the house.

According to Vastu these plants should be planted and kept according to the Vastu directions to get the great benefits. Vastu principles and Institute of Vedic Astrology suggests that plants should be kept in east and northeast directions of the house, which will give the best positive effects in the house.

There are many more things about plants you should know first before planting them in the house. You can get the best knowledge about Vastu and many other plants as per Vastu principles in the Institute of Vedic Astrology.

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